Saturday, January 17, 2015

उसे लौट आने दो

'उसे लौट आने दो

तमाम किताबों को दफनाकर

अपनी कब्र में वापस....'

मुझे वो सारी कब्रें खोदकर
 
जगाना है अपने बुजुर्गों को...
 
खपरैलों वाले उस कच्चे मकान के पीछे

मिट्टी का जो इक चूल्हा है 

उसी की आग को साक्षी रख

पवित्र रीतियों से

कुछ अक्षर टांक दिए थे उन्होंने 

मेरे बदन पर

मुझे उन सारी लिपियों, सारे संकेतों के पार जाना था

अब बरसों बीते उन अमराइयों को पार किये भी 

अक्षर शब्द हुए, शब्द किताबें...

मुझे जगाना है उन्हें

वापस अपने खाली जिस्म तक लौट आने के लिए...

'
उसे लौट आने दो

उसी आँगन उसी चूल्हे में

अपना वजूद बुझा लेने दो...
उसे लौट आने दो

तमाम किताबों को दफनाकर

अपनी कब्र में वापस

उसे लौट आने दो...'

No comments:

Post a Comment