कुछ भी नहीं कहा
अलविदा भी नहीं
यूँ अपने होने के निशां तक
ले गयी
जैसी कभी थी ही नहीं
और ये कमबख्त ज़िन्दगी भी
इक ऐसे कगार पर आ खड़ी है
की बस गिरी गिरी जाती है
बस मिटी मिटी जाती है
कहो
अब ज़िन्दगी को संभालूं
या तुम्हारी यादों को
अलविदा भी नहीं
यूँ अपने होने के निशां तक
ले गयी
जैसी कभी थी ही नहीं
और ये कमबख्त ज़िन्दगी भी
इक ऐसे कगार पर आ खड़ी है
की बस गिरी गिरी जाती है
बस मिटी मिटी जाती है
कहो
अब ज़िन्दगी को संभालूं
या तुम्हारी यादों को